Thursday, 18 January 2018

Neelam Sanjiva Reddy


नीलम संजीव रेड्डी
जन्म - 19 मई 1913, इल्लुर, अनंतपुर ज़िला, आंध्र प्रदेश
निधन - 1 जून 1996, बैंगलोर, कर्नाटक

नीलम संजीव रेड्डी का जन्म 19 मई, 1913 को इल्लुर ग्राम, अनंतपुर ज़िले में हुआ था जो आंध्र प्रदेश में है। आंध्र प्रदेश के कृषक परिवार में जन्मे नीलम संजीव रेड्डी की छवि कवि, अनुभवी राजनेता एवं कुशल प्रशासक के रूप में थी। इनका परिवार संभ्रांत तथा भगवान शिव का परम भक्त था। इनके पिता का नाम नीलम चिनप्पा रेड्डी था जो कांग्रेस पार्टी के काफ़ी पुराने कार्यकर्ता और प्रसिद्ध नेता टी. प्रकाशम के साथी थे।

शिक्षा

नीलम संजीव रेड्डी की प्राथमिक शिक्षा 'थियोसोफिकल हाई स्कूल' अड़यार, मद्रास में सम्पन्न हुई। आगे की शिक्षा आर्ट्स कॉलेज, अनंतपुर में प्राप्त की। महात्मा गांधी के आह्वान पर जब लाखों युवा पढ़ाई और नौकरी का त्याग कर स्वाधीनता संग्राम में जुड़ रहे थे, तभी नीलम संजीव रेड्डी मात्र 18 वर्ष की उम्र में ही इस आंदोलन में कूद पड़े थे। इन्होंने भी पढ़ाई छोड़ दी थी। संजीव रेड्डी ने सविनय अवज्ञा आंदोलन में भी भाग लिया था। यह उस समय आकर्षण का केन्द्र बने, जब उन्होंने विद्यार्थी जीवन में सत्याग्रह किया था। वह युवा कांग्रेस के सदस्य थे। उन्होंने कई राष्ट्रवादी कार्यक्रमों में हिस्सेदारी भी की थी। इस दौरान इन्हें कई बार जेल की सज़ा भी काटनी पड़ी।

राजनीतिक करियर

1946 में उनकी नियुक्ती मद्रास वैधानिक असेंबली में कांग्रेस प्रतिनिधि के रूप में की गयी, इसके बाद रेड्डी कांग्रेस वैधानिक पार्टी के सेक्रेटरी भी बने। इसके साथ-साथ वे मद्रास से भारतीय संवैधानिक असेंबली के सदस्य भी थे। अप्रैल 1949 से अप्रैल 1951 तक वे मद्रास राज्य से निषेध, आवास और वन मिनिस्टर भी थे। 1951 के चुनाव में कम्युनिस्ट लीडर तरिमेला नागी रेड्डी के खिलाफ मद्रास वैधानिक असेंबली के लिए हुए चुनाव में उन्हें हार का सामना करना पड़ा था।

भारत के राष्ट्रपति

21 जुलाई 1977 को नीलम संजीव रेड्डी की नियुक्ती राष्ट्रपति के पद पर की गयी और 25 जुलाई 1977 को वे भारत के छठे राष्ट्रपति बने। रेड्डी ने तीन सरकारों के साथ काम किया था, प्रधानमंत्री मोरारजी देसाई, चरण सिंह और इंदिरा गांधी। भारत की आज़ादी की 20 वी एनिवर्सरी पर रेड्डी ने घोषणा की थी वे राष्ट्रपति भवन को छोड़कर एक छोटे आवास में रहने के लिए जा रहे है और उन्होंने उन्हें मिलने वाले पैसो में 70% की कटौती देश के विकास के लिए भी की थी।

मृत्यु

भारतीय राष्ट्रपति के रूप में अपने कार्यकाल पूरा होने पर, रेड्डी अपने गांव इलुरु से वापस लौट गये। कृषि के साथ अपना जीवन जारी रखा। 1 जून 1996 को बंगलुरु में 83 वर्ष की आयु में उनका निधन हो गया।

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