Thursday, 18 January 2018

Fakhruddin Ali Ahmed


फखरुद्दीन अली अहमद
जन्म - 13 मई, 1905, दिल्ली
मृत्यु - 11 फरवरी, 1977, दिल्ली

फखरुद्दीन अली अहमद का जन्म 13 मई 1905 को भारत में नयी दिल्ली के हौज़ क़ाज़ी भाग में हुआ था। उनके पिता ज़ल्नुर अली अहमद, पहले आसामी इंसान थे जिनके पास एम.डी.(डॉक्टर ऑफ़ मेडिसिन) की उपाधि थी और साथ ही उत्तर-पूर्व भारत से भी वे यह डिग्री हासिल करने वाले पहले भारतीय थे।
उनकी माँ लोहरू के नवाब की बेटी थी। अहमद के दादा खालिलुद्दीन अली अहमद आसाम के गोलाघाट में कचारिघाट के पास रहते थे और स्थानिक लोग एक आसामी मुस्लिम परिवार के रूप में उनका सम्मान करते थे।
उत्तर प्रदेश के गोंडा जिले की सरकारी हाई स्कूल से अहमद ने प्राथमिक शिक्षा प्राप्त की थी और दिल्ली सरकार की हाई स्कूल से उन्होंने मेट्रिक की परीक्षा पास की थी। इसके बाद पढाई करने के लिए वे सेंट स्टेफेन कॉलेज, दिल्ली और सेंट कैथरीन कॉलेज, कैम्ब्रिज में दाखिल हुए। इसके बाद 1928 में वे लाहौर हाई कोर्ट में लॉ का प्रशिक्षण ले रहे थे।

राजनैतिक सफर

फखरुद्दीन अली अहमद भारत के एक ऐसे सफल राजनेता थे जिन्होंने अपने राजनीतिक जीवन की स्थाई छाप भारतीय जनता के ऊपर छोड़ा, जो आजतक भरतीय जनता के लिए प्रेरणा का श्रोत बना हुआ है। इन्हें असम और भारत के महान सपूत के रूप में भी याद किया जाता है। अपने विचारों के माध्यम से इन्होने भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन में अपना अमूल्य योगदान दिया था। इसके अलावा भारत के राष्ट्रपति के रूप में इन्होंने नि:स्वार्थ सेवा और नैतिक मूल्यों के प्रति अपनी प्रतिबद्धता का उदाहरण प्रस्तुत करते हुए राष्ट्र के निर्माण में अपना अमूल्य योगदान दिया। महात्मा गांधी और पं. जवाहर लाल नेहरू के नेतृत्व में इन्होंने एक लोकप्रिय नेता के रूप में देश का नेतृत्व भी किया। इंग्लैंड प्रवास के दौरान फखरुद्दीन अली अहमद की मुलाकात वर्ष 1925 में पं. जवाहर लाल नेहरू से हुई. नेहरू जी के प्रगतिशील विचारों से वे बेहद प्रभवित हुए और उन्हें अपना गुरु तथा मित्र मानने लगे एवं वर्ष 1930 से उनके साथ कार्य करने लगे। नेहरू जी के अनुरोध पर फखरुद्दीन अली अहमद भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस में शामिल हो गए और सक्रिय रूप से भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में भाग लिया। जबकि उनके सह-धर्मिओं ने उनको मुस्लिम लीग में शामिल होने के लिए राजी किया गया था. उन्होंने देश की आजादी के लिए वर्ष 1940 में सत्याग्रह आन्दोलन में सक्रीय रूप से भाग लिया, जिसके कारण उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया और जेल जाना पड़ा। इसके अलावा उन्हें वर्ष 1942 में 9 अगस्त को ‘भारत छोड़ो आंदोलन’ के समर्थन में भाग लेने के आरोप में पुनः गिरफ्तार कर लिया गया, जब वे अखिल भारतीय कांग्रेस समिति (एआईसीसी) की ऐतिहासिक मुंबई बैठक से वापस लौट रहे थे। इस प्रकार अप्रैल 1945 तक यानि लगभग साढ़े तीन वर्षों तक देश की सुरक्षा को उनसे खतरा बताकर उन्हें एक कैदी के रूप में जेल में रखा गया था। उन्होंने कांग्रेस पार्टी में कई महत्वपूर्ण पदों पर कार्य किया. वे वर्ष 1935 में असम विधानसभा के लिए निर्वाचित किया गये थे। बाद में वे वर्ष 1936 में असम प्रदेश कांग्रेस कमेटी के सदस्य बने। इसके बाद वे सितम्बर 1938 में असम प्रदेश में वित्त, राजस्व और श्रम मंत्री बने। उन्होंने अपने मंत्रीत्व काल के दौरान अपनी कुशल प्रशासनिक क्षमताओं का श्रेष्ठ सबूत पेश किया। उन्होंने मंत्री रहते हुए ‘असम कृषि आयकर विधेयक’ लागू किया, यह भारत में पहली ऐसी घटना थी जब चाय बागानों की भूमि पर टैक्स  लगाया गया। उनकी श्रमिक-समर्थक नीति की वजह से अंग्रेजों के स्वामित्व वाली ‘असम आयल कंपनी लिमिटेड’ के कर्मचारी हड़ताल पर चले गए। परिणाम स्वरुप अली अहमद को कड़ी आलोचनाओं का सामना करना पड़ा। इन घटनाओं से उनकी कुशल प्रशासनिक क्षमता भी देखने को मिली।

राष्ट्रपति के रूप में उनका कार्यकाल

वर्ष 1969 में कांग्रेस के विभाजन के समय फखरुद्दीन अली अहमद ने इंदिरा गांधी का साथ चुना क्योंकि उनका नेहरू और उनके परिवार के साथ घनिष्ठ सम्बन्ध था। इसके बाद उन्हें तत्कालीन प्रधानमंत्री श्रीमती इंदिरा गांधी के सहयोग से 29 अगस्त, 1974 को भारत का 5वां राष्ट्रपति चुना गया. डॉ. जाकिर हुसैन के बाद राष्ट्रपति बनने वाले वे दूसरे मुस्लिम थे। वर्ष 1975 में आपातकाल लगने के बाद फखरुद्दीन अली अहमद विपक्ष के निशाने पर थे क्योंकि उन्होंने प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के कहने पर आपातकाल से सम्बब्धित दस्तावेज पर हस्ताक्षर किया था।

सम्मान

उन्हें 1 9 75 में कोसोवो में यूनिवर्सिटी ऑफ प्रिस्टिना द्वारा मानद डॉक्टरेट की उपाधि से सम्मानित किया गया, जब उन्होंने यूगोस्लाविया की यात्रा की। वह असम फुटबॉल संघ और असम क्रिकेट एसोसिएशन के अध्यक्ष चुने गए थे; वह असम स्पोर्ट्स काउंसिल के उपराष्ट्रपति भी थे। अप्रैल 1 9 67 में, उन्हें अखिल भारतीय क्रिकेट संघ के अध्यक्ष चुना गया। वह 1 9 61 से दिल्ली गोल्फ क्लब और दिल्ली जिमखाना क्लब के सदस्य थे। 1942 में उन्हें भारत छोड़ो आंदोलन में गिरफ्तार किया गया और 31/2 साल की कारावास की सजा सुनाई गई। वह 1936 में असम प्रदेश कांग्रेस समिति के सदस्य और 1947 से 1974 के एआईसीसी के सदस्य थे, और 1938
में गोपीनाथ बोर्डोली मंत्रालय में वित्त, राजस्व और श्रम मंत्री बने और वह औद्योगिक कानून स्थापित करने वाले पहले राष्ट्रपति हैं। उनके सम्मान में बारपेटा असम में एक मेडिकल कॉलेज फखरुद्दीन अली अहमद मेडिकल कॉलेज का नाम रखा गया है।

निधन

11 फरवरी, 1977 में हृदयगति रुक जाने से अहमद का कार्यालय में निधन हो गया।

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