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Friday, 2 February 2018

खुजली (Itching)

घरेलू नुस्खे

1. नारियल का तेल (Coconut oil)- त्वचा के शुष्क होने या किसी कीड़े के काटने से, खुजली किसी भी कारण से हो, नारियल का तेल बेहद फायदेमंद होता है। नारियल के तेल को खुजली वाले स्थान पर लगाकर हल्के हाथ से मालिश करें। इतना ही नहीं नारियल तेल को पूरे शरीर पर भी लगाया जा सकता है।

2. पेट्रोलियम जैली (Petroleum jelly)- यदि त्वचा बेहद संवेदनशील (sensitive skin) है तो खुजली से निजात के लिए पेट्रोलियम जैली बेहद अच्छा उपाय है। इसमें कोई भी रसायन नहीं होता और त्वचा पर बेहद प्रभावी भी होती है। इसके इस्तेमाल से न केवल खुजली बल्कि त्वचा की अन्य समस्याएं भी हल हो जाती हैं।

3. नींबू (Lemon)- नींबू में विटामिन सी (vitamin c) उच्च मात्रा में पाया जाता है। खुजली से निजात के लिए नींबू बेहद अच्छे उपायों में से एक है। नींबू में मौजूद वोलाटाइल (volatile) त्वचा की सूजन और जलन को दूर करते हैं। प्रभावित त्वचा पर नींबू के रस को रूई की सहायता से लगाया जा सकता है।

4. बेकिंग सोडा (Baking soda)- तीन हिस्से बेकिंग सोडा में एक हिस्सा पानी मिलाकर एक पेस्ट बनायें। इस पेस्ट को प्रभावित स्थान पर लगाने से खुजली की समस्या से राहत मिलती है। लेकिन त्वचा कटी-फटी हो तो बेकिंग सोडा लगाने से बचना चाहिए।

5. तुलसी (Basil)- तुलसी में थायमॉल, यूजीनॉल और कैंफर उच्च मात्रा में होते हैं जो खुजली और जलन से राहत देते हैं। तुलसी की कुछ पत्तियों को अच्छी प्रकार धोकर, प्रभावित स्थान पर रगड़ने से खुजली और जलन से राहत मिलती है।

6. सेब का सिरका (Apple cider vinegar)- सेब के सिरके का इस्तेमाल रूसी से निजात के लिए किया जाता है, उसी प्रकार खुजली में भी यह लाभदायक है। सेब के सिरका में एंटीसेप्टिक और एंटीफंगल गुण होते हैं जो कि त्वचा संबंधी समस्याओं से निजात दिलाते हैं। सेब के सिरका में रूई को भिगाकर प्रभावित स्थान पर लगाने से खुजली की समस्या से राहत मिलती है।

7. एलोवेरा (Aloevera)- एलोवरा मॉइश्चराइजर से भरपूर होता है जिससे रूखी त्वचा से होने वाली खुजली में यह असरकारी है। एलोवेरा जेल प्रभावित त्वचा पर लगाने से खुजली, जलन और सूजन दूर होती है। त्वचा पर एलोवेरा लगाने के लिए इसकी एक पत्ती को चाकू से बीच से चीर कर उसके अंदर से जैली को बाहर निकालें और शरीर पर हल्के हाथों से मसाज करें।

हैजा (Cholera)

घरेलू नुस्खे
1.एक गिलास पानी में शहद, नींबू और नमक मिलाकर पियें।
2.10 से 20 मिलीग्राम जिंक की जरूरत रोज होती है, ऐसे में जिंक के सप्लीमेंट लें।
3.पेय पदार्थ की मात्रा बढ़ायें। पानी, नींबू पानी, छाछ आदि पीते रहें।
4.दही में केला मिलाकर खाएं।
5.अदरक को कद्दूकस करके शहद के साथ मिलाकर खाएं। यदि शौच में खून के धब्बे आ रहे हों तो अदरक न खाएं।
6.प्याज और काली मिर्च को पीसकर पेस्ट बनाएं। इसे दिन में तीन बार एक हफ्ते के लिए खाएं।
7.लौंग डालकर पानी को उबालें और छानकर, इस पानी को पीएं।
8.दही में मेथी पाउडर और जीरा पाउडर डालकर खाएं।

चेचक(Chickenpox)

उपचार

1. सेब का सिरका (Apple Cider Vinegar)- आधा कप सेब के सिरके को हल्के गर्म पानी में मिलाकर नहाने से राहत मिलती है। इस पानी में तकरीबन 20 मिनट तक जरूर बैठें।

2. विटामिन ई तेल (Vitamin E Oil)- विटामिन-ई युक्त तेल को शरीर पर लगाने से चिकन पॉक्स के दौरान होने वाली खुजली से राहत मिलती है।

3. जई का आटा (Oat Flour)- चिकन पॉक्स होने पर शरीर में बहुत तेज खुजली होती है। खुजली से बचने के लिए जई के आटे को पानी में मिलाकर स्नान करना चाहिए। 2 लीटर पानी में 2 कप जई का आटा मिलाकर लगभग 15 मिनट तक उबालें, पके आटे को एक कॉटन के बैग में अच्छी तरह से बांधकर बॉथ टब में डालकर नहाएं।

4. हर्बल चाय (Herbal Tea)- तुलसी, गेंदा और कैमोमाइल को मिलाकर चाय बनाइए फिर उसमें शहद या नींबू मिलाकर पीजिए। इस चाय को दिन में 3-4 बार पीने से राहत मिलती है।

5. हरी मटर (Green Pea)- हरी मटर को पानी में पकाकर इसके पानी को शरीर में लगाइए, इससे चिकन पॉक्स के लाल चकत्ते समाप्त होते हैं।

6. बेकिंग सोडा (Baking Soda)- आधा चम्मच बेकिंग सोडा को एक गिलास गुनगुने पानी में मिलाएं और इस लेप को पूरे शरीर पर लगाकर सूखने दें। इससे चिकनपॉक्स जल्द ठीक हो जाता है।

7. गाजर (Carrot)- उबले गाजर और धनिया खाने से चिकन पॉक्स से आई कमजोरी कम होती है। गाजर और धनिया का सूप बनाकर पीने से राहत मिलती है।

8. भूरा सिरका (Brown Vinegar)- आधा कप भूरे सिरके को पानी में डालकर नहाने से शरीर में हो रही खुजली से निजात पायी जा सकती है। इससे दानों की सूजन कम होती है और दाने सूखने भी लगते हैं।

9. नींबू का रस (Lemon Juice)- नींबू का रस पीने से चिकन पॉक्स में राहत मिलती है। उपचार के लिए समय समय पर एक गिलास साफ पानी में नींबू निचोड़कर पीते रहें।

10. नीम की पत्तियां (Margosa Leaves)- नीम की पत्तियों को गर्म पानी में डालकर नहाने से खुजली समाप्त होती है। नीम प्राकृतिक रूप से एंटी बैक्टीरियल गुणों से भरपूर होता है। ऐसे में चिकन पॉक्स ठीक करने में बेहद फायदेमंद है।

नकसीर (नाक से खून बहना)

उपचार

1. गाजर : 200 मिलीलीटर गाजर का रस और 50 मिलीलीटर पालक के रस को एक साथ मिलाकर पीने से नाक से खून बहना रुक जाता है।

2. पानी: अगर ज्यादा तेज धूप में घूमने की वजह से नाक से खून बह रहा हो तो सिर पर लगातार ठंडे पानी को डालने से नाक से खून बहना बंद हो जाता है।

3. मूली: अगर रोगी की नाक से ज्यादा खून बह रहा हो तो 30 ग्राम कच्ची मूली के रस में मिश्री मिलाकर पिलाने से आराम आता है।

4. चूना: रात को सोने से पहले 400 मिलीलीटर पानी के अन्दर 50 ग्राम चूने को डालकर रख दें। सुबह उठकर इस पानी को छान लें। इस छने हुए पानी को लगभग 25 मिलीलीटर तक रोगी को पिलाने से नकसीर ठीक हो जाती है।

5. सौंफ: 25 मिलीलीटर सौंफ को 25 ग्राम गुलाब के रस में मिलाकर खाने से नकसीर (नाक से खून बहना) ठीक जाती है।

6. कपड़ा: अगर रोगी की नाक से खून बह रहा हो तो उसे उल्टा करके लिटा दें। फिर नाक की जिस तरफ से खून बह रहा हो उसके उल्टी तरफ के हाथ में किसी कपड़े को कसकर बांध दें। कुछ ही समय में नकसीर (नाक से खून बहना) बंद हो जाएगी।

7. इलायची: गर्मियों के मौसम में नकसीर पर सेब के मुरब्बे में छोटी इलायची को डालकर खाने से बहुत आराम आता है।

8. उड़द: उड़द की दाल को भिगोकर पीस लें। इस पिसी हुई दाल को माथे पर लगाने से नकसीर (नाक से खून बहना) बंद हो जाती है।

9. मिश्री: लगभग 50 ग्राम सूखे हुए कमल के फूल और 50 ग्राम मिश्री को एक साथ मिलाकर पीसकर चूर्ण बना लें। इस चूर्ण को 1 चम्मच गर्म दूध के साथ फंकी लेने से सिर्फ 1 ही हफ्ते में नकसीर का रोग दूर हो जाता है।

10. शहद: शहद या गुड़ के साथ गूलर के पके हुए फल को खाने से नाक से खून आना बंद हो जाता है।

11. गन्ना: गन्ने के रस को नाक मे डालने से नकसीर (नाक से खून बहना) बंद हो जाता है।

12. कटेरी: कटेरी के फल, पत्तों और जड़ को पीसकर रस निकाल लें। इस रस को सिर के तालु में लगाने से नाक से खून बहना बंद हो जाता है।

13. शक्कर: देशी शक्कर को गाय के दूध में मिलाकर नस्य लेने से नकसीर गिरना (नाक से खून बहना) बंद हो जाता है।

निमोनिया (Pneumonia)

उपचार

1.तुलसी भी निमोनिया में बहुत उपयोगी है। तुलसी के कुछ ताजे पत्तों का रस, एक चुटकी काली मिर्च में मिलकर रख लें और हर छ घंटे के बाद दें।
2.थोड़े से गुनगुने पानी के साथ शहद लेना भी लाभदायक रहता है। 
3.ताजा अदरक का रस लेने या अदरक को चूसने से भी निमोनिया में आराम मिलता है।       
4.रोगी का कमरा स्वच्छ, और गर्म होना चाहिए। कमरे में सूर्य की रौशनी अवश्य आनी चाहिये।
5.गर्म तारपीन तेल का और कपूर के मिश्रण से छाती पर मालिश करने से निमोनिया से राहत मिलती है।
6.तिल के बीज भी निमोनिया के उपचार में सहायक होते हैं। 300 मिलीलीटर पानी में 15 ग्राम तिल के बीज, एक चुटकी साधारण नमक, एक चम्मच अलसी और एक चम्मच शहद मिलकर प्रतिदिन उपयोग करने से फेफड़ों से कफ बाहर निकलता है।

बदहज़मी (Gastric Problem)

लक्षण

1.खट्टी डकारें आना,
2.खाना या खट्टा पानी (एसिड) मुंह में आ जाना,
3.गले से खरखराहट महसूस होना और सांस फूलने की भी शिकायत होना,
4.छाती के निचले भाग में दर्द का महसूस होना और उलटी करने का मन करना,

उपाय

1. धनिया (Dhaniya)


धनिया के इस्तेमाल से पेट में गैस के कारण होने वाली जलन में राहत महसूस कर सकते हैं। एक गिलास छाछ में भुना हुआ धनिया मिलाकर पीने से गैस से राहत मिलती है।

2. सौंफ के बीज (Saunf seeds)

 

मसालेदार या वसायुक्त भोजन करने के कारण गैस और अपच जैसी समस्याएं होती हैं, इसके लिए सौंफ के बीच से इसका इलाज संभव है। सौंफ के बीज में मौजूद तेल, मतली और पेट फूलना जैसी समस्याओं से राहत देता है। सौंफ को सुखाकर, भूनकर उसका पाउडर बना लें। दिन में दो बार इस पाउडर के इस्तेमाल से गैस से काफी हद तक राहत मिल जाती है।

3. काली मिर्च (Black Peeper)
 

हमारे पेट में हाइड्रोक्लोरिक एसिड की कमी को पूरा करने के लिए काली मिर्च का उपयोग बहुत कारगर हो सकता है। काली मिर्च से आमाशय रस का प्रवाह बढ़ता है, जिससे यह पाचन में मदद करती है। गुड़ में काली मिर्च का पाउडर मिलाकर अपच के दौरान छाछ के साथ लिया जा सकता है। इसके अलावा काली मिर्च, सूखे पुदीना के पत्ते, सौंठ पाउडर और धनिया बीज बराबर मात्रा में मिलाकर पीने से भी अपच में फायदा होता है।

4. लौंग (Laung or Clove)
 

लौंग आंत गतिशीलता और जठरांत्र स्राव को बढ़ाती है जिससे गैस और अपच की समस्या खत्म हो जाती है। इसके लिए लौंग को चबाएं। पेट में जलन से छुटकारा पाने के लिए लौंग का तेल इस्तेमाल किया जा सकता है।

5. सेब का सिरका (Apple cider vinegar)
 

सेब का सिरका गैस और अपच दोनों से राहत देता है। यह हमारे पेट को आवश्यक एसिड प्रदान करता है। गैस के इलाज के लिए इसे पानी और शहद के साथ लिया जा सकता है।

6. छाछ (Butter Milk)
 

अपच और गैस के इलाज के लिए छाछ बहुत फायदेमंद है। इसमें अधिक लैक्टिक एसिड होता है और यह दूध की तुलना में पचने में आसान होता है।

7. बेकिंग सोडा (Baking Soda)
 

बेकिंग सोडा में अतिरिक्त एसिड का मुकाबला करने के लिए एक प्रभावी और सामान्य रूप से एंटासिड उपलब्ध रहता है। सोडा का मूल स्वभाव नमक और पानी के गठन से पेट में अतिरिक्त हाइड्रोक्लोरिक एसिड बनाना होता है। जिससे गैस से राहत मिलती है।

8. हर्बल चाय (Herbal Tea)
 

हर्बल चाय पाचन सहजता में प्रभावी ढंग से काम करती है। पुदीना, रैस्बेरी और ब्लैकबेरी चाय को अपच को कम करने के लिए खाना खाने के बाद लिया जा सकता है। पुदीना और कैमोमाइल (Mint and Camomile) तेज पेट दर्द होने पर फायदेमंद हैं।

9. लहसुन (Garlic)
 

लहसुन से मुँह में तेज गंध आ सकती है लेकिन इसकी छोटी सी कली में गैस की समस्या से राहत पाने के अभूतपूर्व गुण होते हैं। गैस को दूर करने में लहसुन बहुत फायदेमंद है। लहसुन का इस्तेमाल सूप में करने से यह पाचनशक्ति को और मजबूत करता है। इसके अलावा पानी में लहसुन को उबालकर उसमें काली मिर्च और जीरा डालें, इस घोल को ठंडा होने दें। इसे एक दिन में दो से तीन बार पीएं।

10. अदरक (Ginger)
 

अदरक खाने में न केवल सुगंध और चरपराहट जोड़ता है बल्कि खाने को पचाने में भी सहायक है। अदरक खाद्य पदार्थ के रूप में या अदरक की चाय में इस्तेमाल किया जाता है जिससे यह लार, पित्त रस और आमाशय रस में उत्तेजना पैदा करने में मदद करता है। कॉफी और सोडा की तुलना में अदरक की चाय पीना बहुत अधिक लाभदायक है।

11. इलायची (Elaichi)


इलायची पेट में गैस और में अपच में बहुत आरामदायक होता है। इसमें मौजूद वाष्पशील तेल पाचन विकार को दूर कर गैस और अपच से राहत देते हैं। इलायची के बीज का यूं ही सेवन किया जा सकता है या खाना पकाने, चाय आदि में भी इलायची या इलायची पाउडर का इस्तेमाल कर सकते हैं।

12. नींबू (Lemon)


गैस की रोकथाम और अपच के इलाज करने वाले प्राकृतिक उपायों में से एक नींबू है। गर्म पानी के साथ नींबू का रस मिलाकर पीने से उल्टी, गैस और डकार से छुटकारा मिल सकता है। यह एक सफाई एजेंट के रूप में, एक रक्त शोधक के रूप में कार्य करता है और पित्त रस का उत्पादन करके शरीर में पाचन तेज करता है। सुबह एक गिलास ताजे पानी में नींबू का रस मिलाकर पीने से भी पाचनतंत्र मजबूत होता है।

13. हींग (Hing)
 

हींग से पेट फूलना, पेट दर्द और कब्ज जैसी कई पाचन संबंधी समस्याओं का इलाज कर सकते हैं। एक चुटकी हींग दिन में दो से तीन बार गर्म पानी के साथ ली जा सकती है।

14. अजवाइन (Ajwain)
 

गैस से छुटकारा पाने के लिए दादी-नानी का नुस्खा है। इसके इस्तेमाल से पेट की लगभग हर समस्या का इलाज कर सकते हैं। तत्काल राहत के लिए अजवाइन में नमक मिलाकर पानी के साथ लें।

अपच (Indigestion)

लक्षण

1.अपच होने पर भूख नहीं लगती
2.कभी-कभी रोगी को घबराहट भी हो जाती है
3.खट्टी-खट्टी डकारें आती हैं
4.छाती में तेज़ जलन होती है
5.जी मिचलाता है
6.पेट में गैस बनना
7.पेट में भारीपन महसूस होता है
8.मुंह में बार बार पानी भर जाता है तथा पेट में हर समय हल्का-हल्का दर्द होता रहता है

उपचार


1. सेब का सिरका (Apple cider vinegar)


सेब के सिरके में यूं तो एसिडिक गुण होते हैं लेकिन यह एसिड से राहत देने में भी प्रभावी है। अपच से राहत के लिए एक चम्मच कच्चे और अनफिल्टर्ड सेब के सिरके को एक कप पानी में मिलाएं। इसके बाद इसमें एक चम्मच कच्चा शहद मिलाएं। इस पेय को दिन में दो से तीन बार पीएं। अपच से राहत मिलेगी।

2. सौंफ (Saunf)


अपच से बचाव के लिए सौंफ भी बेहद गुणकारी है। बहुत मसालेदार और वसा वाले खाने से होने वाली अपच को बेहद जल्दी ठीक कर देती है। अपच से बचाव के लिए सौंफ के दानों को तवे पर हल्का सा गर्म करें और उसका पाउडर बना लें। पानी के साथ इस पाउडर को दिन में दो बार लें। सौंफ के दानों से तैयार चाय या सौंफ को यूं ही मुंह में डालकर चबाने से भी अपच से राहत मिलती है। साथ ही यह माउथ फ्रेशनर की तरह काम भी करती है।

3. अदरक (Ginger)


अदरक में मौजूद पाचन रस और एंजाइम खाने को पचाने में बेहद लाभकारी हैं। अपच से राहत के लिए अदरक के छोटे छाटे टुकड़ों पर नमक डालकर उन्हें यूं ही चबाया जा सकता है। इसके अलावा दो चम्मच अदरक के रस में नींबू का रस, थोड़ा सा काला और थोड़ा सा सफेद नमक मिलाकर बिना पानी के पीने से बेहद राहत मिलती है।

इसके अलावा अदरक के रस और शहद को गुनगुने पानी के साथ भी लिया जा सकता है। अदरक की चाय भी बेहद लाभकारी होती है। इतना ही नहीं खाना बनाने में अदरक का प्रयोग मसाले के तौर पर करने से भी अदरक बेहद लाभ देता है।

4. बेकिंग सोडा (Baking Soda)


अपच से बचने के लिए बेकिंग सोडा सबसे आसान घरेलू उपाय है। आधे गिलास पानी में थोडा़ सा बेकिंग सोडा मिलाकर इस पानी को पीएं। इससे तुरंत राहत मिलती है।

5. अजवायन (Ajwain)


अजवायन पेट को दुरूस्त रखने और खाने को पचाने के साथ ही पेट दर्द से भी राहत देती है। सौंठ और अजवायन को मिलाकर पाउडर बनाएं। एक चम्मच पाउडर में काली मिर्च मिलाएं और गर्म पानी के साथ पीएं। इस पेय को दिन में एक या दो बार पी सकते हैं। अजवायन के दानों को मुंह में रखकर चबाने से भी आराम मिलता है।

6. हर्बल चाय (Herbal Tea)


पुदीना या कैमोमाइल की हर्बल या ग्रीन टी भी पाचन शक्ति को दुरूस्त रखती है। खाना खाने के बाद एक कप हर्बल टी पीने से खाना जल्दी पचता है और पेट में वसा भी जमा नहीं होती। ऐसे में आपका वजन भी ठीक रहता है। लेकिन खाने के बाद सामान्य चाय या कॉफी से बचना चाहिए।

पेशाब में जलन (Burning sensation while urination)

उपचार

1. कालीमिर्च: 5 कालीमिर्च के दानों और 10 ग्राम रतनजोत को पानी के साथ पीसकर उसमें खांड मिलाकर रोगी को पिलाने से पेशाब मे जलन दूर होती है।

2. दूध: 250 मिलीलीटर दूध और 250 मिलीलीटर पानी में खांड को मिलाकर पीने से पेशाब की जलन के रोग में लाभ मिलता है।

3. रेवन्दचीनी: 10 ग्राम रेवन्दचीनी को पीसकर आधा ग्राम की मात्रा में सुबह और शाम पानी के साथ सेवन करने से पेशाब की जलन दूर हो जाती है।

4. शोराकलमी: 10 ग्राम शोराकलमी और बड़ी इलायची के दानों को पीसकर चूर्ण बनाकर लगभग 4 ग्राम की मात्रा में पानी या दूध के साथ सुबह और शाम खाने से पेशाब की जलन दूर होती है।

5. खमीरा: 6 ग्राम खमीरा सन्दल को पानी के साथ सुबह और शाम लेने से पेशाब की जलन के रोग मे लाभ होता है।


6. आंवला: आधा कप आंवले के रस में 2 चम्मच शहद को मिलाकर पीने से पेशाब की जलन शांत हो जाती है।

7. मुलेठी: 1 चम्मच मुलेठी का चूर्ण एक कप दूध के साथ लेने से पेशाब की जलन दूर हो जाती है।

8. दूब हरी : दूब की जड़ को पीसकर सेवन करने से मूत्रकृच्छ (पेशाब करने में जलन या कष्ट होना) की विकृति नष्ट हो जाती है।

9. चीकू: चीकू का सेवन करने से पेशाब की जलन शांत हो जाती है।

10. अदरक: सौंठ, कटेली की जड़, बला मूल, गोखरू को 2-2 ग्राम की मात्रा में और 10 ग्राम गुड़ को 250 मिलीलीटर दूध में उबालकर सुबह-शाम पीने से मल-मूत्र के कारण होने वाला दर्द शांत हो जाता है।

11. गेंहू: रात को सोने से पहले 10 ग्राम गेहूं को 250 मिलीलीटर पानी में भिगो दें। सुबह के समय इस पानी को छानकर उस पानी में 25 ग्राम मिश्री को मिलाकर पीने से पेशाब की जलन दूर हो जाती है।

12. ईसबगोल: 1 गिलास पानी में 3 चम्मच ईसबगोल की भूसी को भिगोकर उसमें स्वाद के मुताबिक बूरा डालकर पीने से पेशाब की जलन दूर हो जाती है।

13. कलौंजी: 250 मिलीलीटर दूध में आधा चम्मच कलौंजी का तेल और 1 चम्मच शहद को मिलाकर पीने से पेशाब की जलन के रोग में फायदा होता है।

14. कचनार: कचनार के सूखे फल के चूर्ण 5 से 10 ग्राम की मात्रा में सेवन करने से पेशाब की जलन मिट जाती है।

15. गोखरू: गोखरू के पत्ते और फल को बराबर मात्रा में मिलाकर काढ़ा तैयार करके और छानकर आधा कप की मात्रा में दिन में 3 बार सेवन करने से पेशाब की जलन में बहुत जल्द ही आराम मिलता है।

16. फूलगोभी: फूलगोभी की सब्जी का सेवन करने से पेशाब की जलन दूर हो जाती है।

17. अलसी: अलसी के बीजों का काढ़ा 1-1 चम्मच की मात्रा में दिन में 3 बार पीने से मूत्रनली की जलन और मूत्र सम्बंधी कष्ट दूर होते हैं।

18. खस (पोस्त के दाना): खस की जड़ का चूर्ण एक चम्मच की मात्रा में 3 बार पानी से खाने से पेशाब की जलन और पेशाब की रुकावट दूर होती है।

19. नींबू: नींबू के रस में जवाखार को मिलाकर सेवन करने से पेशाब की जलन कम हो जाती है और पेशाब अधिक आता है।

20. पानी: धूप, गर्मी के कारण या गर्म प्रकृति की चीजों को खाने से पेशाब में जलन हो, पेशाब बूंद-बूंद करके आता हो तो ठंडे पानी या बर्फ के पानी में कपड़ा भिगोकर नाभि से नीचे रखनें सें पेशाब खुलकर और बिना दर्द के आता है।

21. बरगद: बरगद के पत्तों से बना काढ़ा 50 मिलीलीटर की मात्रा में 2-3 बार सेवन करने से पेशाब की जलन दूर होती है। इस काढ़े को सिर पर लगाने से सिर का भारीपन, नजला और जुकाम में भी लाभ होता है।

22. अरबी: अरबी के पत्तों का रस 3 दिन तक पीने से पेशाब की जलन मिट जाती है।

23. तोरई: नियमित रूप से तोरई का सेवन करने से पेशाब की जलन दूर होती है और पेशाब खुलकर आता है।

रूसी (Dandruff)

उपचार

1. बेसन-
दही और बेसन मिलाकर सिर की त्वचा की हल्के हाथों से मालिश करें। ऐसा करने से भी डैंड्रफ खत्म हो जाता है।

2. तुलसी- तुलसी और आंवले के पाउडर को मिलाकर लेप बनाएं और सिर की त्वचा पर आधा घंटा लगा रहने दें। इसके बाद शैंपू करें।

3. सिरका- सिरका और पानी को बराबर मात्रा में मिलाकर लगाने से भी डैंड्रफ खत्म होता है। इस मिश्रण को रात भर लगाकर सुबह बालों में शैंपू करें।

4. दही- दही को स्कैल्प में लगाकर एक घंटा छोड दें और उसके बाद सिर धो लें।

5. एलोवेरा- एलोवेरा जेल की मालिश करने से भी सिर की त्वचा संबंधी कई समस्याएं ठीक हो जाती हैं।

6. नारियल तेल- 5 चम्मच नारियल तेल में एक चम्मच नींबू रस मिलाकर लगाने से भी डैंड्रफ ठीक हो जाता है।

7. नीम की पत्ती- नीम की पत्तियों का लेप सिर की त्वचा को गीला किए बिना ही लगाएं और कुछ देर बार सिर धो लें।

8. नींबू- 3 या 4 नींबू के छिलके उतारकर उन्हें 4 या 5 कप पानी में 15 से 20 मिनट उबालें। जब ठंडा हो जाए तो इस घोल से बाल धोने के बाद लास्ट रिंस दें।

9. मेथी- मेथी दानों को रात में भिगोकर सुबह उसे पीसकर लेप बनाएं और सिर की त्वचा में लगाएं, कुछ समय बाद धो दें। बालों की सभी समस्याओं में फायदा होगा।

दस्त (Loose Motion)

उपचार

1.नींबू पानी (Lemonade)


नींबू का रस पेट साफ करने में सहायक है। उपचार के लिए एक गिलास पानी में थोड़ी चीनी, थोड़ा नमक और एक नींबू का रस मिलाकर पिएं। इससे शरीर में पानी की कमी नहीं होगी और लूज मोशन भी रूक जाएंगे।

2.अनार (Pomegranate)

लूज मोशन के उपचार के लिए अनार को चबाकर खाएं। यदि दाने चबाना पसंद न हो तो अनार का ताजा रस निकालकर भी पिया जा सकता है। इससे भी दस्त रूक जाते हैं।

3.मेथी (Fenugreek Seeds)

मेथी जीवाणुरोधी होती है जो कि लूज मोशन रोकने में सहायक है। उपचार के लिए एक से दो चम्मच मेथी के दाने लेकर इनका पाउडर बना लें। इस पाउडर को एक गिलास पानी में डालकर पिएं।

4.सरसों के बीज (Mustard Seeds)

सरसों के बीज लूज मोशन रोकने में कारगर होते हैं। उपचार के लिए थोड़े से पानी में सरसों के बीज डालकर एक घंटे के लिए अलग रख दें। इसके बाद इस पानी को टॉनिक की तरह पिएं। लूज मोशन से राहत मिलेगी।

5.कच्चा पपीता (Raw Papaya)

कच्चा पपीता लूज मोशन से राहत देता है साथ ही पेट की मरोड़ और पेट दर्द से भी निजात दिलाता है। उपचार के लिए, पपीते को कद्दूकस करके तीन कप पानी में डालें। इस पानी को लगभग दस मिनट तक उबालें। यही पानी आपको दिन में तीन से चार बार पीना है। ऐसा करने से दस्त रूक जाएंगे।

गंजापन (Baldness)

घरेलू उपाय

1. अरंडी का तेल (Castor Oil)


अरंडी का तेल गंजापन को दूर करने का सबसे कारगर दवा है। यह एक आद्रर्क यानि मॉस्चराइजिंग एजेंट की तरह काम करता है। यह बाल और त्वचा की कई और समस्याओं में काम करता है। गंजेपन को भगाने के लिए आपको बस और कुछ नहीं अपने हथेली पर थोड़ा अरंडी का तेल लें और इसे सिर में लगा कर अच्छी तरह से मसाज करें। यह आपके बालों की जड़ों को पोषण देगा और बहुत जल्द आपके सिर पर बाल उगने लगेंगे।

2. काली मिर्च (Black Pepper)


काली मिर्च गंजापन के इलाज में काफी फायदेमंद है। काली मिर्च और नींबू के बीज को मिला कर कूट लें और फिर उसका गाढ़ा पेस्ट बना लें। इस पेस्ट को बालों की जड़ों पर फैला कर लगा लें। काफी असर होगा।

3. मेंथी के बीज (Methee)

मेंथी के बीज भी गंजेपन को दूर करने में काफी कारगर होते हैं। मेंथी के बीज को कूट कर पेस्ट बना लें और सिर में जहां बाल नहीं है वहां लगा लें। एक घंटा तक पेस्ट लगा हुआ छोड़ दें। बाद में सिर को पानी से धो लें। काफी असर होगा।

4. अरहर की दाल (Toor Daal)

गंजेपन की इलाज के लिए अरहर की दाल भी बेस्ट है। अरहर की दाल को पीस कर पेस्ट बना लें। इस पेस्ट को सिर के प्रभावित क्षेत्र में लगाएं, जल्द ही असर दिखने लगेगा।

5. ऐलोवेरा जेल (Aloe Vera Gel)

ऐलो वेरा एक हर्बल पौधा है और यह बाल और त्वचा के लिए काफी ही प्रभावकारी दवा है। ऐलो वेरा जेल बालों के ग्रोथ में काफी काम करता है। गंजापन के इलाज के लिए कुछ नहीं बस ऐलोवेरा जेल को सिर में लगाएं और अच्छी तरह से सिर की मसाज करें। जल्द ही असर दिखने लगेगा। यह बालों की जड़ में बंद हुए छिद्र को खोल देता है।

6. नारियल तेल (Coconut Oil)

नारियल तेल बालों की जड़ों को पोषण देता है। रात में सोते समय बालों की मालिश नारियल तेल से दस मिनट तक करें। यह hair follicles को बढ़ने में मदद करेगा। सुबह उठ कर बालों को धो लें। आप नारियल तेल में नींबू का रस भी मिला सकते हैं।

डेंगू (Dengue)

उपचार

1.तुलसी (Basil)


तुलसी के पत्तों को गरम पानी में उबालकर छानकर, रोगी को पीने को दें। तुलसी की यह चाय डेंगू रोगी को बेहद आराम पहुंचाती है। यह चाय दिनभर में तीन से चार बार ली जा सकती है।

2.धनिया पत्ती (Coriander Leaves)

डेंगू के बुखार से राहत के लिए धनिया पत्ती के जूस को टॉनिक के रूप में पिया जा सकता है। यह बुखार को कम करता है।

3.आंवला (Indian Gooseberry)

आंवला में विटामिन सी की उच्च मात्रा होती है जिससे कि शरीर में एब्जॉर्ब करने की क्षमता बढ़ती है। इससे शरीर ज्यादा लौह तत्व एब्जॉर्ब कर पाता है जो कि डेंगू के बुखार को ठीक करने के लिए जरूरी है।

4.मेथी के पत्ते (Fenugreek Leaves)

मेथी के पत्ते भी डेंगू के बुखार को ठीक कर सकते हैं। मेथी के पत्तों को पानी में उबालकर हर्बल चाय के रूप में इसका पयोग किया जा सकता है। मेथी से शरीर के विषाक्त पदार्थ बाहर निकल जाते हैं जिससे डेंगू के वायरस भी खत्म होते हैं।

5.पपीते की पत्ती (Papaya Leaves)

पपीते की पत्तियां, डेंगू के बुखाार के लिए सबसे असरकारी दवा कही जाती है। पपीते की पत्तियों में मौजूद पपेन एंजाइम (papain enjymes) शरीर की पाचन शक्ति को ठीक करता है, साथ ही शरीर में प्राटीन को घोलने का काम करता है। डेंगू के उपचार के लिए पपीते की पत्तियों का जूस निकाल कर एक एक चम्मच करके रोगी को दें। इस जूस से प्लेटलेट्स की मात्रा तेजी से बढ़ती है।

6.बकरी का दूध (Goat Milk)

डेंगू बुखार के लिए एक और बुहत प्रभावशाली दवा है बकरी का दूध। बहुत कम होचुकी प्लेटलेट्स को भी बकरी का दूध तुरंत बढ़ाने की क्षमता रखता है। डेंगू के उपचार के लिए रोगी को बकरी का कच्चा दूध थोड़ा-थोड़ा करके पिलाएं, इससे प्लेटलेट्स बढ़ेंगे और जोड़ों के दर्द में भी आराम मिलेगा।

7.चिरायता (Chirayta)

चिरायता में बुखार को ठीक करने के गुण होते हैं। डेंगू के बुखार को भी चिरायता के इस्तेमाल से ठीक किया जा सकता है।

8.धतूरा (Dhatura)

धतूरे की पत्तियों में डेंगू के बुखार को ठीक करने के गुण होते हैं, लेकिन इसकी खुराक 2 डेसीग्राम से अधिक नहीं होनी चाहिए।

स्वप्नदोष (Night Fall)

उपचार

1. गोक्षुर : गोक्षुर, आंवला और हरड़ का चूर्ण मिश्री के साथ खाने से स्वप्नदोष का रोग दूर होता है।

2. नकछिकनी : नकछिकनी, सौंठ, बायबिण्डग 10-10 ग्राम कूट छानकर उसमें 30 ग्राम खांड़ को मिलाकर 5 ग्राम की मात्रा को खुराक के रूप में सुबह खाली पेट कच्चे दूध के साथ खाने से लाभ होता है।

3. गुलकन्द : गुलकन्द 5-10 ग्राम की मात्रा मे रोजाना सुबह-शाम मिश्री मिले दूध के साथ खाने से लाभ मिलता है।

4. बड़ी गोक्षुर : बड़े गोक्षुर के चूर्ण में घी मिलाकर रोज खाने से स्वप्नदोष दूर होता है।

5. पीपलामूल : पीपलामूल 30 ग्राम और गुड़ 40 ग्राम को मिलाकर 1-1 ग्राम की गोली बनाकर सेवन करने से स्वप्नदोष नहीं होता है और नीन्द अच्छी आती है।

6. अमरबेल :
अमरबेल का रस मिश्री मिलाकर पीने से स्वप्नदोष में फायदा होता है।

7. तुलसी :तुलसी के बीज को सुबह-शाम पानी से लाभ होता है। ध्यान रहें कि रात को गरम दूध न पीयें।

8. चोपचीनी : चोपचीनी का पिसा हुआ चूर्ण 10 ग्राम, मिश्री 10 ग्राम और घी 10 ग्राम मिलाकर 7 दिनों तक खाने से स्वप्नदोष खत्म होता है।

9. आंवला : आंवले का चूर्ण 6 ग्राम और मिसरी का चूर्ण 6 ग्राम मिलाकर रोज खाने से कुछ हफ्ते में स्वप्नदोष खत्म होता है।

10. खादिर (कत्था) : खादिर (कत्था) सार 1 ग्राम, ठंड़े पानी के साथ खाने से स्वप्नदोष खत्म होता है।

11. गिलोय :
गिलोय, गोक्षुर और आंवला तीनों को बराबर मात्रा में कूट पीसकर 1 चम्मच चूर्ण को खाकर पानी को पीने से स्वप्नदोष खत्म होता है।

12. कलौंजी : एक कप सेब के रस में आधा चम्मच कलौंजी का तेल मिलाकर सुबह, शाम खाली पेट और रात में खाने के बाद सोते समय सेवन करना चाहियें रोज कलौंजी के तेल की चार बूंद एक चम्मच नारियल तेल में मिलाकर सोते समय सिर में लगाना चाहिए इस प्रकार 21 दिन तक प्रयोग करने से स्वप्नदोष में लाभ होगा इस रोग मे यह लेते समय नींबू का सेवन न करें।

13. इलायची : आंवले के रस में इलायची के दाने और ईसबगोल को बराबर मात्रा में मिलाकर 1-1 चम्मच की मात्रा में सुबह-शाम सेवन करने से स्वप्नदोष में लाभ होता है।

14. असगंध : असगंध, विदारीकन्द 25-25 ग्राम कूटकर छान लें और 50 ग्राम खांड मिलाकर 5-5 ग्राम की मात्रा में सुबह-शाम पानी से सेवन करने से स्वप्नदोष में आराम मिलता है।

15. असरोल : असरोल, धनियां 10-10 ग्राम पीसकर 1 ग्राम सोते समय रात को पानी के साथ सेवन करें।

16. अजवायन : खुरासानी अजवायन के साथ लगभग आधे ग्राम कपूर की गोली मिलाकर रात को सोने से पहले खाने से स्वप्नदोष में लाभ होता है।

17. समुद्रशोष : 3 से 6 ग्राम समुद्रशोष के बीजों को पानी में भिगों कर उससे बने लुआवदार घोल में मिश्री मिलाकर सुबह शाम सेवन करने से वीर्य का स्तम्भन होता है।

18. लहसुन : रात को सोने से पहले हाथ, पैर और मुंह को धोकर पोछ लें फिर लहसुन की 1 कली मुंह में चबा-चबाकर खाने से स्वप्नदोष के रोग में लाभ मिलता है।

19. प्याज : 10 मिलीलीटर सफेद प्याज का रस, 8 मिलीलीटर अदरक का रस, शहद 5 ग्राम और घी 3 ग्राम मिलाकर रात को सोने से पहले पिलाने से स्वप्नदोष नहीं होता है।

20. कतीरा : कतीरा गोंद खाने से भी स्वप्नदोष में लाभ मिलता है।

21. ढाक : ढाक के फूल, बबूल के फूल, लाजवन्ती के फूल, कबाब चीनी और धनिया बराबर भाग लेकर ठंड़े ताजा पानी के साथ सिल पर, मिश्री मिलाकर घोंटकर शर्बत बना कर स्वप्नदोष से पीड़ित रोगी को सेवन करायें।

22. फिटकरी : फिटकरी की 50 ग्राम चिकनी-सी डली रात में सोने से पहले पेडु यानी नाभि पर रख लें इससे रात में स्वप्नदोष नहीं होगा।

23. रूमीमस्तगी : रूमी मस्तगी को घी के साथ भून लें। 1 ग्राम मिश्री मिलाकर सुबह-शाम लेने से पित्तज स्वप्नदोष दूर होता है।

24. इमली : इमली के थोड़े-से बींजो को दूध में भिगोकर छिलका उतार लें। फिर उसमें उतनी ही मात्रा में मिश्री को मिलाकार पीसकर चटनी बनाकर 1 चम्मच चटनी को खुराक के रूप में रोज 20 दिन तक दूध के साथ स्वप्नदोष में रोगी को प्रयोग कराने से लाभ होता है।

25. ईसबगोल : ईसबगोल और मिश्री मिलाकर 1-1 चम्मच एक कप दूध के साथ सोने से 1 घंटा पहले लें और सोने से पहले पेशाब करके सोने से स्वप्नदोष में आराम मिलता है।

26. अनार : अनार के सूखे पीसे हुए छिलके की 1 चम्मच रात को सोने से पहले ठंड़े पानी के साथ फंकी के रूप में लेने से सोते समय पुरुष के शिशन से धातु के आने में लाभ मिलता है।

27. गोखरू : 1 चम्मच की मात्रा में गोखरू के फल का चूर्ण, थोड़ा सा घी और मिश्री मिलाकर 1 हफ्ते तक रोजाना सुबह-शाम लेने से स्वप्नदोष के रोग में लाभ होता है।

काली खांसी (Whooping Cough)

घरेलू उपाय

1. तुलसी के पत्ते और कालीमिर्च समान मात्रा में पीस लें। इसकी मूंग के बराबर की गोलियां बना लें। एक-एक गोली को चार बार देना चाहिए। इससे काली खांसी नष्ट हो जाती है।

2. काली खांसी होने पर बच्चों को बिस्तर पर सुलाने से पहले उसके सीने और कमर पर कपूर को तेल में मिलाकर मालिश करें, काली खांसी बन्द हो जाएगी।

3. पीपल, काकड़ासिंगी, अतीस और बहेड़ा सभी औषधियों को 20-20 ग्राम की मात्रा में लेकर बारीक कूट-पीसकर चूर्ण तैयार कर लें। इसमें 10 ग्राम नौसादर, 10 ग्राम भुना हुआ सुहागा मिलाकर पीस लें। इसके 3 ग्राम चूर्ण को दिन में 2-3 बार चाटने से काली खांसी दूर हो जाती है।

4. हल्दी की 3-4 गांठों को तोड़कर तवे पर भूनें और पीसकर चूर्ण बना लें। इस चूर्ण को 3-3 ग्राम सुबह-शाम पानी से लेने से कालीखांसी में आराम आता है।

5. अदरक के रस को शहद में मिलाकर 2-3 बार चाटने से काली खांसी का असर खत्म हो जाता है।

6. 3 बादाम रात को पानी में डालकर रख दें। सुबह उठकर बादाम के छिलके उतारकर लहसुन की एक कली और मिश्री के साथ मिलाकर पीस लें। इस मिश्रण को बच्चों को खिलाने से काली खांसी दूर हो जाती है।

7. बच्चों को कुकर खांसी होने पर लहसुन की माला पहनाते हैं जिससे इसकी गंध खांसने के साथ-साथ अन्दर चली जाती है और इसी का रस आधा चम्मच शहद के साथ भी पिलाएं। इससे काली खांसी दूर हो जाती है। दस बूंद या एक चम्मच लहसुन का रस (उम्र के अनुसार) शहद मिलाकर प्रतिदिन दो-तीन बार सेवन करने से खूब लाभ मिलता है।

8. तवे को आग पर रखकर लौंग को भून लें, फिर उस लौंग को पीसकर शहद में मिलाकर चाटने से काली खांसी ठीक हो जाती है। बच्चों को काली खांसी में एक चौथाई ग्राम से कम गोलोचन को सुबह-शाम शहद के साथ चटाने से लाभ मिलता है।

9. तुलसी के पत्तों के 3 ग्राम रस में शहद मिलाकर चाटने से कालीखांसी में बहुत अधिक लाभ मिलता है।

10. अड़ूसा के सूखे पत्तों को मिट्टी के बर्तन में रखकर, आग पर गर्म करके उसकी राख को तैयार कर लें। उस राख को 24 से 36 ग्राम तक की मात्रा में लेकर शहद के साथ रोगी को चटाने से कालीखांसी दूर हो जाती है।

11. मूली का 50 मिलीलीटर रस और गन्ने का रस मिलाकर दिन में 2 बार पिलाने से कुकर खांसी में लाभ मिलता है।

12. 3 मिलीलीटर नारियल का तेल हल्का गर्म करके बच्चे को पिलाने से खांसी का प्रकोप कम हो जाता है। नारियल की जटा की भस्म करके लगभग 1 ग्राम का चौथा भाग शहद में मिलाकर या पानी से खाएं। इससे 2-3 बार में ही खांसी का वेग व खांसी खत्म हो जाती है।

घुटनों का दर्द (Knee Pain)

उपचार

1. लाल मिर्च (Red Chilli)


लाल मिर्च के इस्तेमाल से घुटनों के दर्द में भी राहत मिलती है, इसमें मौजूद केपसाइसिन दर्द निवारक की तरह काम करता है। एक से डेढ़ कप तेल में दो बड़े चम्मच लाल मिर्च पाउडर डालकर एक पेस्ट तैयार करें। कम से कम एक सप्ताह तक हर दिन दो बार यह पेस्ट घुटनों पर लगाएं। घुटनों के दर्द से राहत मिलेगी।

2. अदरक (Ginger)

घुटने का दर्द मांसपेशियों में तनाव की वजह से हो या गठिया के कारण, अदरक दोनों ही स्थिति में बेहद लाभप्रद है। इसमें एंटी़फ्लेमेबल गुण होते हैं जो घुटने की सूजन और दर्द को कम कर देते हैं। एक कप पानी में थोड़ा सा अदरक का टुकड़ा लेकर 10 मिनट उबाल लें। इसके बाद इसको ठंडा करके इसमें थोड़ा सा नींबू का रस और शहद मिलाएं। इस घोल को रोज पीएं। आप चाहें तो अदरक के तेल से घुटनों की मालिश भी कर सकते हैं।

3. नींबू (Lemon)


नींबू भी गठिया की वजह से घुटने के दर्द के लिए एक घरेलू लाभकारी उपाय है। नींबू में पाया जाने वाला साइट्रिक एसिड (citric acid) गठिया में यूरिक एसिड क्रिस्टल को घुलाता है। एक नींबू छोटे-छोटे टुकड़ों में काटें। इन टुकड़ों को सूती कपड़े में डालकर गर्म तिल के तेल में डुबाएं। इसके बाद पांच से 10 मिनट के लिए प्रभावित घुटने पर कपड़ा रखें। एक दिन में दो बार ऐसा करने से दर्द पूरी तरह चला जाता है।

माइग्रेन

उपचार

1-  तुलसी का तेल (Basil or Tulsi)

तुलसी के प्राकृतिक गुणों को सभी जानते हैं लकिन आपको बता दें कि तुलसी माइग्रेन में भी बेहद प्रभावी है। तुलसी का तेल का इस्तेमाल माइग्रेन के दर्द में काफी आराम देता है। तुलसी का तेल मांसपेशियों को आराम देता है जिससे सिर का तनाव कम होता है और दर्द से राहत मिलती है।

2- फिक्स आहार (Dedicated Diet)
सिर दर्द को कम करने और माइग्रेन के दर्द से राहत के लिए अपने आहार में कुछ करने होंगे। माइग्रेन के दर्द से प्रभावित लोगों को साधारण मक्खन की जगह पीनट बटर यानि मूंगफली से बना मक्खन इस्तेमाल करना चाहिए। एवोकैडो, केला और खट्टे फल आदि का इस्तेमाल करना चाहिए।

3-  सिर की मालिश (Oil Massage)

सिर के दर्द को कम करने के लिए मालिश भी एक बहुत प्रभावी तरीका है। एक्सपर्ट्स की मानें तो सिर के पीछे के हिस्से की मालिश करने से माइग्रेन से बहुत राहत मिलती है। इसके साथ ही हाथ पैरों की मालिश भी की जानी चाहिए। मालिश करने से भी रक्त संचार तेज होता है।

4- अदरक (Ginger)

अदरक सिरदर्द दौरान जी मिचलाने और उल्टी की अनुभूति होने वाले लक्षणों से राहत देता है।इसके साथ ही अदरक से सूजन और दर्द भी कम होते हैं। अदरक में मौजूद एंटी फ्लेमेबल गुण पेरशानी पैदा करने वाले लक्षणों को रोकते हैं। अदरक के छोटे से टुकड़े को धोकर, छीलकर उसे पानी में उबालकर, ठंडज्ञ कर लें। इस पानी में शहद और नींबू की कुछ बूंदें मिलाकर पीने से बेहद लाभ मिलता है।

5- लैवेंडर ऑयल (Lavender Oil)

लैवेंडर ऑयल सामान्य सिर दर्द और माइग्रेन दर्द के लिए एक उपयोगी घरेलू उपाय है। लैवेंडर तेल की खुशबू माइग्रेन में बेहद प्रभावी होती है। गर्म पानी में कुछ बूंदे लैवेंडर ऑयल की डालकर उसे सूंघने से बेहद आराम मिलता है। लैवेंडर ऑयल का प्रयोग कभी भी मौखिक रूप से नहीं करना चाहिए।

6-  पेपरमिंट तेल (Peppermint Oil)

पुदीना सिर के तनाव को कम करने में माहिर औषधि है। इसके तेल की तेज महक शरीर में रक्त प्रवाह को नियंत्रित करती है। माइग्रेन या सामान्य सिर दर्द भी अक्सर रक्त प्रवााह के कम होने से होता है ऐसे में पेपरमिंट ऑयल रक्त प्रवाह को कम करके सिर दर्द को ठीक करता है। इस तेल की हल्की मात्रा डायरेक्ट माथे पर लगा सकते हैं। ज्यादा न लगाएं अन्यथा जलन भी महसूस हो सकती है।

7- धनिया (Coriander or Dhania)

धनिया खाने को पचाने और स्वादिष्ट बनाने के लिए बेहरीन मसाले के रूप में जाना जाता है, लेकिन प्राचीन काल से धनिये का प्रयोग माइग्रेन और सिर दर्द की दवा के रूप में भी किया जाता है। माइग्रेन में धनिया के बीजों से तैयार की गई चाय बेह लाभकारी होती है। धनिया के कुछ बीजों को गर्म पानी में 10 मिनट उबालें, उसके बाद इसमें स्वादानुसार चीनी मिलाकर पिएं। धनिया वाली चाय माइग्रेन के दर्द के साथ-साथ सामान्य सिर दर्द में भी लाभकारी है।

मधुमेह (Diabetes)

उपचार

1.दिन में एक बार 2 चम्मच करेले के रास का सेवन करें।
2.दिन में एक बार 2 चम्मच कड़वी लौकी के रस को एक चम्मच आंवला के रास के साथ मिलकर कर सेवन करें।
3.दिन में दो बार 1 चम्मच मेथी के पाउडर का सेवन पानी के साथ अवश्य करें।
4.बबूल की कोमल पत्तियां उखाड़कर लायें और उन्हें सिल पर पानी के साथ पीसें, साथ ही उसमें 4-5 कालीमिर्च भी डाल दें और छानकर पीयें। इससे भी मधुमेह में लाभ होता है। इसे सुबह-शाम प्रयोग में लायें।
5.गूलर के पत्तों को पानी के साथ पीसकर उसे शर्बत के सामान पीने से मधुमेह रोग में लाभ होता है।
6.बेल के पत्तों को कूट-पीसकर उसको किसी कपड़े में बांधकर रस निकालें, 10 मिलीलीटर रस रोजाना पीने से मधुमेह रोग में शर्करा आना कम हो जाता है।

पायरिया (Pyorhoea)

उपचार

1. नमक : नमक बारीक पीसकर 1 ग्राम नमक में 4 ग्राम सरसों का तेल मिलाकर प्रतिदिन मंजन करने से पायरिया रोग नष्ट होता है। इससे दांतों का दर्द और ठंड़ी चीजों के प्रयोग से उत्पन्न दर्द ठीक होता है।

2. आंवला : आंवला को जलाकर इसके राख में थोडा सा सेंधानमक मिलाकर पीसकर पॉउडर बना लें। इस पॉउडर को सरसों के तेल में मिलाकर प्रतिदिन मंजन करने से पायरिया रोग ठीक होता है और मुंह की दुर्गन्ध दूर होती है।

3. खस :
खस और इलायची को लौंग के तेल में मिलाकर प्रतिदिन सुबह-शाम दांतों पर मलने से पायरिया ठीक होता है और मुंह की दुर्गन्ध दूर होती है।

4. लोध्र : लोध्र, लाल चंदन, यिष्टमधु की जड़ और लाक्षा बराबर मात्रा में लेकर कूट-पीसकर दांत व मसूढ़ों पर मलने से दांतों के सभी रोग ठीक होते हैं।

5. आम : आम की गुठली को बारीक पीसकर मंजन बना लें और इससे प्रतिदिन मंजन करें। यह पायरिया को नष्ट करता है और दांतों के अन्य रोग भी खत्म करते हैं।

6. पीपल : पीपल के काढ़े में शहद और घी मिलाकर प्रतिदिन 2 बार कुल्ला करने से पायरिया व मसूढ़ों की सूजन दूर होती है।

7. हरीतकी (हर्रे) : हरीतकी का चूर्ण बनाकर इससे प्रतिदिन मंजन करने से दांत व मसूढ़े स्वस्थ होते हैं और पायरिया ठीक होता है।

8. हल्दी : पायरिया के रोगी को हल्दी का बारीक चूर्ण सरसों के तेल में मिलाकर प्रतिदिन रात को सोते समय दांतों पर मलकर बिना कुल्ला किए सो जाना चाहिए और सुबह उठकर कुल्ला करना चाहिए। इससे दांतों का पायरिया नष्ट होता है।

9. जामुन : जामुन के पेड़ की छाल जलाकर इसके राख में थोड़ा सा सेंधानमक व फिटकरी मिलाकर पीसकर लें। इससे प्रतिदिन मंजन करने से पायरिया रोग ठीक होता है।

10. शुण्ठी : शुण्ठी, सरसों और त्रिफला बराबर मात्रा में लेकर पानी में घोलकर कुल्ला करने से मसूढ़े स्वस्थ रहते हैं और पायरिया रोग ठीक होता है।

11. कायफल : सिरका में कायफल घिसकर मसूढ़ों पर लगातार 5 मिनट तक मलने से दांतों के कीड़े नष्ट होते हैं तथा पायरिया रोग ठीक होता है।

12. बड़ी माई : बड़ी माई का चूर्ण बनाकर इससे दांत व मसूढ़ों पर मलने से मसूढ़ों से खून व पीब आना बन्द होता है। यह मुंह की दुर्गन्ध को दूर करता है और पायरिया रोग को समाप्त करता है।

13. इन्द्रयव : इन्द्रयव का चूर्ण दिन में 2 बार मसूढ़ों पर मलने से मसूढ़ों से खून, पीव एवं मुंह की दुर्गन्ध आदि दूर होती है।

14. पुष्करमूल : पुष्करमूल के चूर्ण को प्रतिदिन दांतों पर धीरे-धीरे मलने से दांतों का हिलना, मुंह की दुर्गन्ध एवं मसूढ़ों से पीव निकलना आदि ठीक होता है। यह पायरिया रोग को नष्ट करता है।

15. तिल : तिल को चबाकर खाने से दांत मजबूत होते हैं और पायरिया रोग नष्ट होता है।

16. नारंगी : नारंगी खाने से पायरिया रोग में लाभ मिलता है। नारंगी के छिलके को छाया में सुखाकर बारीक मंजन बना लें और इससे रोजाना मंजन करने से पायरिया रोग ठीक होता है।

17. कालीमिर्च : 10 ग्राम कालीमिर्च व 20 ग्राम तम्बाकू पीसकर बारीक चूर्ण बना लें और इस चूर्ण से प्रतिदिन मंजन करने से पायरिया रोग खत्म होता है।

18. सुहागा : सुहागा एवं बोल (हीराबोल) को मिलाकर दिन में 2 से 3 बार मसूढ़ों पर धीरे-धीरे मलने से दांत व मसूढ़ों के सभी रोग ठीक होते हैं।

19. गुग्गुल : गुग्गुल को 35 मिलीलीटर पानी में घोलकर मसूढ़ों पर मलने से पायरिया रोग नष्ट होता है। 90 प्रतिशत एल्कोहल में 20 प्रतिशत गुग्गुल मिलाकर मसूढ़ों पर मलने से भी पायरिया में लाभ मिलता है।

20. लौंग : 5 से 6 बूंद लौंग का तेल 1 गिलास गर्म पानी में मिलाकर प्रतिदिन गरारे व कुल्ला करने से पायरिया रोग नष्ट होता है।

21. मेथी : मेथी के दाने पानी में भिगोकर मेथी छानकर पानी पीने और मेथी में मिश्री मिलाकर खाने से पायरिया रोग में लाभ मिलता है।

22. गुलाब :
गुलाब का गुलाबी फूल खाने से दांत मजबूत होते हैं और मसूढ़ों से खून व मवाद आना बन्द हो जाता है।

23. सुपारी : सुपारी को जलाकर चूर्ण बना लें और इससे प्रतिदिन 2 बार मंजन करें। यह पायरिया को नष्ट करता है और मसूढ़ों से खून आना बन्द करता है।

24. व्याघ्रैरण्ड (बघण्डी) : व्याघ्रैरण्ड के पत्तों का काढ़ा बनाकर प्रतिदिन कुल्ला करने से मसूढ़ों से खून निकलना बन्द होता है। इससे पायरिया रोग नष्ट होता है।

25. सिरस (सिरस) : सिरस के छाल का काढ़ा बनाकर बार-बार कुल्ला करने से मसूढ़ों के रोग में आराम मिलता है।

26. बबूल : बबूल की छाल का काढ़ा बनाकर गरारे व कुल्ला करने से पायरिया रोग में लाभ मिलता है।

27. ईसबगोल : ईसबगोल को सिरके में मिलाकर दांतों पर मलने से पायरिया रोग ठीक होता है।

टी. बी. (Tuberculosis)

उपाय

1. आंवला (Amla)- आंवला में एंटीफ्लेमेटरी (anti inflammatory) और एंटीबैक्टीरियल (antibacterial) गुण होते हैं। जो शरीर का इम्यून सिस्टम मजबूत करके शरीर को ऊर्जा प्रदान करते हैं।आंवला के बीज निकालकर, जूस बनाएं और इसमें एक चम्मच शहद मिलाकर सुबह सुबह पीएं।

2. काली मिर्च (Black pepper)- काली मिर्च फेफड़ों (lungs) की सफाई का काम करती है। जिससे टीबी के दौरान होने वाले सीने के दर्द से राहत मिलती है। इसके साथ ही यह टीबी के कीटाणुओं को मारने का काम भी करती है। मक्खन में आठ से दस काली मिर्च फ्राई करें। इसमें एक चुटकी हींग मिलाएं और पाउडर बना लें। इस मिश्रण को तीन बराबर भागों में बांट लें। कुछ कुछ घंटे के अंतराल पर इसकी एक एक डोज खाएं।

3. लहसुन (Garlic)- लहसुन में सल्फ्यूरिक एसिड (sulphuric acid) प्रचुर मात्रा में होता है जो कि टीबी के कीटाणुओं को मारने में सक्षम है। इसके साथ ही लहसुन में एलीसिन (allicin) और एजोइनी (agoeni) भी होते हैं जो कि टीबी के पनपने वाले कीटाणुओं का खत्म करने का काम करते हैं। इतना ही नहीं लहसुन के एंटीबैक्टीरियल गुण इम्यूनिटी को भी बढ़ाते हैं। आधी चम्मच लहसुन, एक कप दूध और चार कप पानी को एक साथ मिलाकर उबालें। इसे तब तक उबालें जब तक यह मिश्रण एक चौथाई रह जाए। इस मिश्रण को दिन में तीन बार पीएं।

4. केला (Banana)- केला पोषक तत्वों और कैल्शियम का बहुत अच्छा स्त्रोत है। यह टीबी के मरीज का इम्यून सिस्टम बढा़ने में सहायक है। इसके साथ ही बुखार और कफ से भी राहत देता है। एक पके हुए केले को एक कप नारियल के पानी में मसलकर मिलाएं। इसके बाद इसमें दही और शहद मिलाएं। इसे दिन में दो बार खाएं। कच्चे केले का जूस बनाकर रोजाना पीएं। केले के तने का जूस बनाकर भी पीया जा सकता है।

5. अखरोट (Walnut)- अखरोट टीबी के मरीजों को ताकत देता है, उनकी इम्यूनिटी बढ़ाता है और जल्दी ठीक होने में भी मदद करता है। अखरोट के पाउडर में कुछ कली लहसुन की मिलाकर कुचल लें। इसमें क्लेरीफाइड मक्खन (clarified butter) मिलाकर खाएं। अखरोट को यूं भी खाया जा सकता है या इसके पाउडर को सलाद में डालकर खाएं।

6. संतरा (Orange)- संतरे में भी जरूरी मिनरल्स (minerals) और कंपाउंड (compound) होते हैं। संतरे में मौजूद सलाइन (salain) शरीर को इंफेक्शन से बचाता है साथ ही इम्यून सिस्टम को मजबूत करता है। ताजा संतरे के रस में थोड़ा सा नमक और शहद मिलाकर रोजाना सुबह शाम पीएं। संतरे को छीलकर उसकी स्लाइस पर भी नमक छिड़क कर खाया जा सकता है।

7. शरीफा (Custard apple)- टीबी के उपचार के लिए शरीफा भी बेहद फायदेमंद है। दो शरीफों का पल्प निकालकर उसे पानी में उबाल लें, इसके साथ पच्चीस किशमिश (kishmish) को भी उबाल लें। जब पानी एक तिहाई रह जाए तब इसे छानकर इसमें पाउडर शुगर मिलाएं। इस पेय में इलायची और दालचीनी मिलाकर दिन में दो बार पीएं।

पीले दाँत (Yellow Teeth)

उपचार

1. नींबू- (Lemon)
 

नींबू के प्राकृतिक ब्लीचिंग (natural bleach) के गुण दांतों पर भी असर दिखाते हैं। पीले दांतों के लिए नींबू के छिलके को दांतों पर रगड़ा जा सकता है, या नींबू के पानी से गरारे भी किए जा सकते हैं। नींबू के साथ नमक मिलाकर दांतों की मसाज करें। दो हफ्तों तक रोजाना दो बार करने से दांत चमकने लगेंगे।

2. नमक- (Salt)


नमक को पुराने समय से ही दांतो की सफाई के लिए इस्तेमाल किया जाता रहा है। यह दांतों के खोए मिनरल्स लौटाता है जिससे दांतों का सफेद रंग बना रहता है। रोजाना सुबह टूथपेस्ट की तरह नमक को दांतों की सफाई के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है। नमक को चारकोल में मिलाकर भी दांतों की सफाई की जा सकती है जिससे दांत सफेद होते हैं। नमक और बेकिंग पाउडर मिलाकर भी मंजन तैयार किया जा सकता है।

3. तुलसी- (Basil)


तुलसी में भी दांतों को सफेद बनाने का गुण होता है। इसके साथ ही तुलसी पायरिया आदि से भी दांतों की रक्षा करती है।तुलसी के पत्तों को सुखाकर पाउडर बना लें। इस पाउडर को रोजाना इस्तेमाल करने वाले टूथपेस्ट में मिलाकर दांतों की सफाई करें।तुलसी के पत्तों का पेस्ट बनाकर उसमें सरसों का तेल (mustard oil) मिलाएं। इस पेस्ट से दांतों की सफाई करने पर भी बहुत फायदा होता है।

4. बेकिंग सोडा- (Baking Soda)


बेकिंग सोडा दांतों को सफेद बनाने का सबसे आसान तरीका है। यह दांतों से प्लाक को खत्म करके दांतों की सफेदी और चमक बनाए रखता है। रोज ब्रश करते समय अपने पेस्ट में थोड़ा सा बेकिंग पाउडर डालें और ब्रश करें। दांतों की सफेदी लौट आएगी। एक कप पानी में बेकिंग सोडा और हाइड्रोजन पर ऑक्साइड (hydrogen peroxide) मिलाकर माउथ वॉश (mouthwash) की तरह भी इस्तेमाल किया जा सकता है।

5. संतरे का छिलका- (Peel of Orange)


संतरे के छिलके से रोज दांतों की सफाई करने से कुछ ही दिनों में पीले दांत चमकने लगेंगे। रोज रात को सोते समय संतरे के छिलके को दांतों पर रगड़ें। संतरे के छिलके में विटामिन सी (vitamin c) और कैल्शियम के साथ माइक्रोऑर्गेनिज्म (micro organism) होता है जो दांतों की मजबूती और चमक बनाए रखता है।

6. स्ट्रॉबेरी- (Strawberry)


स्ट्रॉबेरी में भी विटामिन सी प्रचुर मात्रा में होता है जो कि दांतों को सफेद बनाने में सहायक है। स्ट्रॉबेरी के कुछ टुकड़ों को पीसकर, इस लेप को दांतों पर लगाकर मसाज करें। इसे दिन में दो बार करने से कुछ ही दिनों में पीले दांत सफेद होने लगते हैं।बेकिंग सोडा और स्ट्रॉबेरी के पल्प को मिलाकर भी दांतों पर रगड़ने से दांतों का पीलापन खत्म होता है।